रमजान में जूमे का विशेष महत्व: इस बार रमजाम में आएंगे 5 जूमे
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रुड़की (देशराज पाल)। रमजान का पवित्र महीना कल से शुरू हो गया है। इस बार रमजान की विशेषता यह है कि इस रमजान में पांच जुमा आएंगे। आखिरी जुमा 20 मार्च को। रमजान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र और इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार यह साल नवां महीना होता है। इस महीने में मुसलमान रोजे रखते हैं और रोजे के दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी खाने-पीने की पाबंदी रहती है।
रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय अल्लाह की नेमत के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। महीने भर रोजे रखने के बाद ईद उल फितर मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि आखिरी पैगंबर इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब को वर्ष 610 लैलतुलकद्र के मौके पर पवित्र कुरान शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ था। उसी समय से रमजान को इस्लाम धर्म में पवित्र महीने के तौर पर मनाया जाने की परंपरा शुरू हुई थी। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोगों को कुछ विशेष सावधानियां भी रखनी होती है, जैसे रोजे रखने का अर्थ सिर्फ यह नहीं होता कि आप केवल भूखे-प्यासे रहे, बल्कि इस दौरान मन में बुरे विचार नहीं आने दे। रमजान के दौरान मुसलमान को किसी की बदनामी करने, लालच करने, झूठ बोलने तथा झूठी कसम खाने से परहेज करना चाहिए। रमजान के शुरुआती दस दिनों को रहमतों का दौर माना जाता है और इसके अगले दस दिनों को माफी का दौर माना गया है जबकि रमजान के आखिरी दस दिनों को जहन्नुम से मुक्ति का दौर बताया गया है। रमजान के महीने में मुसलमान तकवा प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। वही रमजान के पहले जुमा के दौरान बाजारों में काफी रौनक देखने को मिली।रमजान की सहरी के इस्तेमाल के लिए पापे,फैनी,खजले की दुकान सज कर तैयार हो गई। रमजान का महीना शुरू होते ही बाजारों में रमजान की खरीदारी के लिए लोगों की काफी भीड़ रही। नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र से भी लोगों ने बाजार पहुंचकर रमजान के समान खासकर शहरी में इस्तेमाल होने वाले समान और खजूर आदि की खूब खरीदारी की, जिससे बाजारों में काफी रौनक देखने को मिली।
