मरने के बाद भी दो नेत्रहीनों की दुनिया को रोशन कर गए मनेद्र सिंह सजवान
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*मरने के बाद बेटों ने अपने पिता की आंखों को किया दान*
*मरने के बाद भी दुनिया देखेगी मनेन्द्र सिंह सजवान की आंखें*
*मरने के 6 घंटे बाद तक की जा सकती है आंखें दान*
*आंखें दान करने के लिए इस नंबर पर करें संपर्क 9837607526*
रुड़की (देशराज पाल)। दो बेटों ने आखिरकार वह कर दिखाया है जो हर कोई दिखाने की हिम्मत तक नहीं कर पाता। इन दो बेटों ने अपने पिता के मरने के बाद उनकी आंखों को दान किया है। उनके द्वारा पिता की आंखों को दान करने से दो नेत्रहीनों को अब दुनिया देखने को मिलेगी। आंखें दान करने की जानकारी जिस किसी को भी लगी उन्होंने इन बेटों की सराहना की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मनेद्र सिंह सजवान उम्र 62 वर्ष निवासी आवास विकास रुडकी, जिला हरिद्वार, उत्तराखंड के निधन के बाद उनके बेटे निखिल सजवान ओर दुसरे बेटे जितेन्द्र सिंह सजवान ने अपने पिता की आँखें दान करने की इच्छा जाहिर की और निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान को सूचना दी। संस्थान की टीम डॉ. मनिका और मक्रेंदु ने आवास पर पहुंचकर सफलतापूर्वक कार्निया प्राप्त किए। बताया गया है कि उस वक्त परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। परिवार ने मानवता और सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेत्रदान कराया। इस नेत्रदान के माध्यम से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आएगी और वे इस सुन्दर संसार को देख सकेंगे। निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान प्रशासन ने परिवार की सेवा भावना और सामाजिक जागरूकता की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान महादान है, जो किसी व्यक्ति को नया जीवन देने के सामान है।संस्थान ने लोगों से अपील भी की है कि मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए आगे आयें, ताकि हजारों नेत्रहीनो के जीवन में उजाला लाया जा सके। उन्होंने नेत्रदान के लिए आवश्यक बातें बताई है। जिसमें उन्होंने बताया कि मृत्यु के 6 घंटें के भीतर आँखें दान की जा सकती हैं।इस दौरान मृतक की आँखें बंद रखनी चाहिए। उन पर गीली रुई रखनी चाहिये तथा कमरे में पंखा बंद और यदि संभव हो तो ऐसी चालू रखना चाहिए। सिर के नीचे तकिया रखने से भी प्रक्रिया में सहायता मिलती। उन्होंने बताया कि नेत्रदान करने के लिए वह हमारे नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।+91-9837607526
