रामलीलाएं हमारी संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक: अरविंद कश्यप
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रुड़की (देशराज पाल)। बीटी गंज में आयोजित 106वीं रामलीला महोत्सव के सातवें दिन केवट संवाद, गंगा पार, सुमंत वापसी, दशरथ मृत्यु, भरत कैकई संवाद तथा राम भरत मिलाप का मंचन किया गया। केवट और दशरथ की भूमिका निभा रहे कलाकारों द्वारा दर्शाय गए अभिनय ने सबका मन मोह लिया, वहीं दशरथ के रोल ने सभी की आंखें नम कर दी और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। रामलीला का शुभारंभ श्री रामलीला समिति बीटी गंज रजि० द्वारा प्रभु श्रीराम की आरती तथा गणेश वंदना से हुआ।
व्यापारी नेता अरविंद कश्यप तथा प्रमोद जोहर ने अपने संबोधन में कहा कि रामलीलाएं हमारी संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं, जो समाज को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर सौरभ सिंघल, मनोज अग्रवाल, शशिकांत अग्रवाल, विशाल गुप्ता, नवनीत गर्ग, पार्षद राकेश गर्ग, पूर्व पार्षद संजय कश्यप, शक्ति राणा, प्रदीप परूथी, दीपक शुक्ला सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे। इस दौरान समिति द्वारा अतिथियों एवं पत्रकारों का सम्मान किया।
