January 16, 2026

कचरे से स्वच्छ ऊर्जा की ओर आईआईटी रुड़की ने अपशिष्ट से हाइड्रोजन तकनीक उद्योग को सौंपी

0
IMG_20251203_174334
Getting your Trinity Audio player ready...

रुड़की (देशराज पाल)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी रुड़की ने जैविक द्रव अपशिष्ट के उत्प्रेरक अधितापीय गैसीकरण के माध्यम से हाइड्रोजन-समृद्ध गैस निर्माण से संबंधित अत्याधुनिक तकनीक को इनफिनेट इंटिग्रटिड एनर्जी टेक्नोलोजीज़ एलएलपी को सफलतापूर्वक हस्तांतरित किया है। यह कदम सतत अपशिष्ट-से-ऊर्जा समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह तकनीक प्रोफ़ेसर नरपूरेड्डी शिवा मोहन रेड्डी द्वारा विकसित की गई है, जो जैविक द्रव अपशिष्ट को निरंतर उत्प्रेरक अधितापीय गैसीकरण प्रक्रिया के माध्यम से हाइड्रोजन-समृद्ध गैस में परिवर्तित करती है। यह प्रणाली बड़े पैमाने और व्यावसायिक उपयोग के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
यह नवाचार अपशिष्ट प्रबंधन, हाइड्रोजन प्राप्ति तथा कार्बन-पदचिह्न में कमी हेतु एक टिकाऊ समाधान प्रस्तुत करता है तथा भारत के नवनीकरणीय एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों के साथ पूर्णतः मेल खाता है। यह उद्योगों को जैविक अपशिष्ट एवं द्रव अपशिष्ट को मूल्यवान हाइड्रोजन ईंधन में बदलने की क्षमता प्रदान करता है, जिससे पर्यावरणीय समस्या एक हरित अवसर में बदल जाती है। प्रोफ़ेसर नरपूरेड्डी शिवा मोहन रेड्डी, आविष्कारक, आईआईटी रुड़की ने कहा कि हमारा अनुसंधान प्रक्रिया-दक्षता को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ जोड़ने पर केंद्रित है। यह तकनीक दर्शाती है कि जैविक द्रव अपशिष्ट से हाइड्रोजन को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकता है, जो देश के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में सहायक है। रामचंद्र राजू दंतुलुरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इनफिनेट इंटिग्रटिड एनर्जी टेक्नोलोजीज़ एलएलपी ने कहा कि हम आईआईटी रुड़की के साथ इस परिवर्तनकारी अपशिष्ट-से-हाइड्रोजन तकनीक पर सहयोग कर प्रसन्न हैं। हमारा लक्ष्य इस नवाचार को प्रयोगशाला से उद्योग तक ले जाना है, जिससे भारत हाइड्रोजन-आधारित अर्थव्यवस्था के और निकट पहुँच सके। प्रोफ़ेसर विवेक कुमार मलिक, अधिष्ठाता (प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श), आईआईटी रुड़की कहा कि यह हस्तांतरण आईआईटी रुड़की की उन्नत अनुसंधान को व्यावहारिक औद्योगिक समाधान में परिवर्तित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम भविष्य में भी ऐसी सशक्त भागीदारी जारी रखना चाहते हैं जो तकनीकी नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देती है। प्रोफ़ेसर के. के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा कि आईआईटी रुड़की में हम समाज पर वास्तविक प्रभाव डालने वाली तकनीकों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं। यह अपशिष्ट-से-हाइड्रोजन नवाचार स्वच्छ ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हमारे योगदान का उत्कृष्ट उदाहरण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page