छात्र जुनून और अनुशासन में रहकर अपने सपनों को करें साकार: शुभांशु शुक्ला
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रुड़की (देशराज पाल)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की का ऐतिहासिक परिसर प्रेरणा एवं नवाचार का केंद्र बन गया है। आईआईटी ने आइडियाज मैटर मोस्ट की मेजबानी की, जो एमडीएस इंडोकैन के सहयोग से आयोजित किया गया था, जो विकसित भारत 2047 के विजन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित एक आंदोलन है।आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने शैक्षणिक उत्कृष्टता को नवाचार एवं सामाजिक प्रगति के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके प्रेरक शब्दों ने युवाओं को सीमाओं से परे सोचने और भारत की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
मुख्य अतिथि एवं दिन के अतिथि, इसरो के अंतरिक्ष यात्री, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक ज्ञानवर्धक और प्रेरक सत्र दिया जिसने छात्रों और शिक्षकों को गहराई से प्रेरित किया। उन्होंने भारतीय वायु सेना से इसरो तक के अपने सफर के बारे में बताया और छात्रों से जुनून, अनुशासन एवं उद्देश्य के साथ अपने सपनों को साकार करने का आग्रह किया। प्रो. के. के. पंत निदेशक आईआईटी रुड़की – उद्घाटन भाषण, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अंतरिक्ष यात्री, इसरो – मुख्य अतिथि एवं दिन के अतिथि
डॉ. सुवरोकमल दत्ता – अंतर्राष्ट्रीय रूढ़िवादी राजनीतिक, आर्थिक एवं विदेश नीति विशेषज्ञ, प्रो. भोला राम गुर्जर – निदेशक, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़, डॉ. दिनेश शाहरा, दूरदर्शी उद्योगपति एवं संस्थापक, दिनेश शाहरा फाउंडेशन, डॉ. आनंद हांडा – मुख्य रणनीति अधिकारी, सी3आईहब-आईआईटी कानपुर
अंकुश तिवारी – संस्थापक एवं सीईओ, पाई-लैब्स, अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ सलाहकार संपादक एवं एंकर, डीडी न्यूज़ – राष्ट्रीय संवाद एवं जागरूकता को बढ़ावा, कौशिक केथाराम, संस्थापक, इंन्टैली 360 वेल्थ – भारत भर में वित्तीय स्वतंत्रता का संचालन डॉ. फलाद्रम शर्मा – परियोजना अधिकारी, आईआईटी गुवाहाटी, केंद्रीय विषय, आत्मनिर्भर भारत – विकसित भारत 2047 की ओर एक रोडमैप, सभी सत्रों में गूंजता रहा, जिसमें शिक्षा, नीति एवं उद्योग जगत की आवाजें एकजुट हुईं, जो राष्ट्रीय परिवर्तन की दिशा में भारत के विचारकों, कर्ताओं और सपने देखने वालों को जोड़ने वाले एक शक्तिशाली मंच के रूप में कार्य करता रहा। आइडियाज मैटर मोस्ट” जैसे कार्यक्रमों की मेजबानी करके, आईआईटी रुड़की संवाद, नवाचार एवं राष्ट्र निर्माण को बढ़ावा देने, छात्रों, शिक्षाविदों और उद्योग को जोड़ने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है ताकि एक आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भारत का निर्माण किया जा सके।
