भोजपत्र से पेटेंट तक:भारत में बौद्धिक संपदा का विकास विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान
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रुड़की (देशराज पाल)। चमनलाल महाविद्यालय में यूकॉस्ट देहरादून के सहयोग से एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आई.पी.आर. सेल (Intellectual Property Rights Cell) द्वारा आयोजित किया गया, जिसका विषय था भोजपत्र से पेटेंट तक: भारत में बौद्धिक संपदा का विकास। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अनुसंधान एवं नवाचार की दिशा में नई सोच को प्रोत्साहित करना था।
मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता डॉ. आशीष रतूरी, सहायक प्रोफेसर, फिजिक्स एवं बायोफिजिक्स विभाग, डॉल्फिन (पी.जी.) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने की। मुख्य संरक्षक रामकुमार शर्मा अध्यक्ष चमन लाल महाविद्यालय तथा संरक्षक ईश्वर चंद्र शर्मा एवं अरुण हरित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. अनामिका चौहान, समन्वयक, IPR सेल द्वारा किया गया। अपने प्रेरक व्याख्यान में डॉ. आशीष रतूरी ने बौद्धिक संपदा की उत्पत्ति से लेकर उसके वर्तमान स्वरूप तक की यात्रा को अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारत में प्राचीन काल से ही ज्ञान का संरक्षण एक परंपरा रही है। उस समय विद्वान अपने आविष्कारों, ग्रंथों और विचारों को भोजपत्रों पर अंकित करते थे।आज वही ज्ञान संरक्षण की परंपरा आधुनिक युग में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिज़ाइन पंजीकरण के रूप में विकसित हो चुकी है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी देश की प्रगति केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि रचनात्मकता और नवाचार से होती है। भारत के युवा यदि अपने नवीन विचारों को संरक्षित और व्यावहारिक रूप दें, तो देश ‘ज्ञान अर्थव्यवस्था’ में विश्व गुरु बन सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक शोध, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और उद्यमिता से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार किस प्रकार आर्थिक, शैक्षणिक और औद्योगिक विकास में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। डॉ. रतूरी ने पेटेंट की प्रक्रिया, पेटेंट योग्यता, अनुसंधान नैतिकता, और प्लेजरिज़्म (साहित्यिक चोरी) से संबंधित बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि हर शोध, हर आविष्कार और हर नया विचार देश की अमूल्य बौद्धिक संपदा है, जिसे संरक्षित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. अनामिका चौहान ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि IPR Cell का उद्देश्य छात्रों में सृजनशीलता और अनुसंधान के प्रति नई दृष्टि विकसित करना है।उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में IPR Cell के माध्यम से और भी कई कार्यशालाएँ एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
