January 21, 2026

शरीर की शुद्धि से ज्यादा मन का शुद्ध होना जरूरी: रामकृष्ण उनियाल

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रुड़की (देशराज पाल/राजपाल)। श्रीमद् भागवत कथा सुनने से ज्ञान वैराग्य जागृत होते हैं। जीवन का उद्देश्य परोपकार समान सेवा के लिए होना चाहिए। जब भी फुर्सत मिले ईश्वर का ध्यान अवश्य करना चाहिए। शरीर की शुद्धि से ज्यादा मन का शुद्ध होना जरूरी है।
सोमवार को अशोकापुरम दिल्ली रोड रुड़की में रानू चौधरी, विकास चौधरी ने अपनी माता स्व. राजबाला देवी के एकांदिष्ट वार्षिक श्राद्ध के उपलक्ष में श्रीमद् भागवत कथा का प्रारंभ कराया। रोजाना श्रीमद् भागवत कथा 28 से 3 अगस्त तक दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक चलेगी। श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन कथा वाचक आचार्य रामकृष्ण उनियाल ने कहा कि भागवत कथा सुनने से ज्ञान वैराग्य जागृत होते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने बच्चों के साथ बैठकर भागवत कथा सुननी चाहिए। उन्होंने कहा की भागवत कथा ही हमें अपनी संस्कृति और अपने धर्म के प्रति जागृत करने का काम करती है। भगवान का ध्यान करना ही कल्याणकारी होता है। श्रीमद् भागवत कथा से पूर्व यज्ञाचार्य सुनील उनियाल ने विधि विधान से पूजा कराई। इस मौके पर उनके साथ राजेंद्र प्रसाद गैरोला, हरीश ममगाईं, हरीश प्रसाद कोठारी आदि उपस्थित रहे।

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