भारत अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में सबसे आगे:डॉ. वी. नारायणन
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रुड़की (देशराज पाल)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने 6वें भारतीय ग्रह विज्ञान सम्मेलन आईपीएससी-2025 के साथ-साथ ‘स्थिरता हेतु अंतरिक्ष: विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा एवं नीति’ एस²-स्टैप2025 पर प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। आईआईटी रुड़की के अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र सीएसएसटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य स्थायी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों, ग्रहों की खोज और शिक्षा-उद्योग सहयोग पर वैश्विक चर्चाओं को आगे बढ़ाना है।
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में इसरो के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने किया। भारत कोरिया अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र (आईकेसीआरआई) के निदेशक डॉ. यंग हो किम ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर के. के. पंत ने की। मुख्य भाषण में इसरो के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने जोर देकर कहा, “अंतरिक्ष अन्वेषण का भविष्य टिकाऊ और जिम्मेदार प्रथाओं पर टिका है। भारत अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में सबसे आगे है जो हमारे ग्रह मिशनों और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषणों को आगे बढ़ाएंगे।” भारत कोरिया अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र (आईकेसीआरआई) के निदेशक डॉ. यंग हो किम ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, “अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोगात्मक अनुसंधान स्थिरता सुनिश्चित करने की कुंजी है। भारत-कोरिया साझेदारी वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी एवं नीति में प्रगति पर जोर दिया: भारत-कोरिया विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत करना।” यह सम्मेलन अंतरिक्ष अन्वेषण, विज्ञान शिक्षा, नीति निर्माण और अत्याधुनिक तकनीकी प्रगति के बीच सहजीवी संबंध पर विचार-विमर्श करने के लिए विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और शिक्षकों को एक साथ लाता है। साथ ही, 6वां भारतीय ग्रह विज्ञान सम्मेलन (आईपीएससी-2025) ग्रह विज्ञान में हाल की प्रगति के लिए एक समर्पित मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें सौर मंडल में ग्रहों के पिंडों के वायुमंडल, सतह और आंतरिक भाग, ग्रहीय प्रक्रियाएँ और सौर मंडल के शुरुआती विकास जैसे विषयों को शामिल किया जाता है। सम्मेलन का उद्देश्य एक मजबूत अंतरिक्ष शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, हितधारकों को तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में उभरते अवसरों और चुनौतियों को नेविगेट करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से लैस करना है, साथ ही अंतरिक्ष-आधारित प्रौद्योगिकियों और सेवाओं के सामाजिक लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह अंतरिक्ष विज्ञान में नवीनतम प्रगति, विशेष रूप से आपदा न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं सतत विकास में उनके अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श की सुविधा प्रदान करेगा। गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए सीएसएसटी के प्रमुख एवं सम्मेलन अध्यक्ष प्रोफेसर संजय उपाध्याय ने कहा, “यह सम्मेलन अंतरिक्ष स्थिरता के भविष्य को आकार देने के लिए विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।” अध्यक्षीय भाषण देते हुए, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा, “आईआईटी रुड़की में, हम अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, ग्रह विज्ञान एवं सतत विकास में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सम्मेलन इन क्षेत्रों में नवाचार एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है।”
