जगदीश पैन्यूली बोले सत्संग में वह शक्ति जो व्यक्ति के जीवन को देती है बदल
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रुड़की (देशराज पाल)। निर्माणाधीन श्रीखाटू श्याम मंदिर पीपल वाली गली सुभाषनगर रुड़की मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पंo जगदीश पैन्यूली ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा के साथ-साथ विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है। यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मो द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सजनों का उद्धार और दुर्जनों का संघार किया करते हैं ।
कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान हर्ष सैनी, सपना सैनी, राशि सैनी, अनीता देवी, सूरज रस्तोगी, सुनील भटनागर द्वारा श्री भागवत भगवान का पूजन कर आरती उतारी गई। इस पावन अवसर पर आचार्य अनुज नौटियाल ने भागवत भजन के द्वारा माहौल को भागवतमय एवं भक्ति मय बना दिया।उनके मधुर भजन की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। जैसे ही भजन प्रारंभ हुआ, श्रद्धालु भक्ति भाव से विह्वल हो उठे, कई भक्तगण प्रेमाश्रुओं में डूबकर भजन के सुरों पर झूम उठे। पूरा कथा पंडाल भगवान श्री कृष्ण के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा।
कथावाचक पंo-जगदीश पैन्यूली ने कहा कि मनुष्य से जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है।उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। व्यास ने जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। इस दौरान कपिल चरित्र, सती चरित्र, धु्रव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए पूज्य व्यास ने कहा कि भगवान के नाम मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार उतर जाता है। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया। इसके उपरांत उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की पावन लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है, वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। ऐसे में बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान दिया जाना चाहिए। माता-पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल है। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 36 हजार वर्ष तक राज्य भोगने का वरदान प्राप्त हुआ था। ऐसी कई मिसालें हैं, जिससे सीख लेने की जरूरत है। वेदपाठी ब्राह्मणों कि दिव्य वाणी और मंत्रोच्चार से पूरा समारोह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा एवं पवित्रता से भर गया। ऐसे वातावरण में उपस्थित हर व्यक्ति को शांति, श्रद्धा और भक्ति का अनुभव होता है। उनके मंगलमय मंत्रोच्चार से भक्तजन भावविभोर हो उठे और वातावरण भक्तिमय और पवित्रता से भर गया। कथा मे अमरा देवी, हेमलता देवी, अनीता भटनागर, प्रियंका सैनी, दीप जैन, अंजना शर्मा, शालू शर्मा, गरिमा भारद्वाज, सजल, कृष्णा भटनागर, कृष्णा सैनी, अंजू त्यागी, राजीव त्यागी, रौशनी बडोनी, सरोजबाला देवी, शिवम् भटनागर, अनीता वर्मा, मधु शर्मा, प्रीति शर्मा, देवेंद्र, नीलम तिवारी, बिना सक्सेना, ऋतू पंवार, सुनीता चौधरी, तनु, कोन्ति देवी, आदि श्रोता उपस्थित रहे।
