ब्रह्माकुमारीज महासचिव राजयोगी बीके बृजमोहन के निधन पर श्रद्धांजलि
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रुड़की (देशराज पाल)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महासचिव राजयोगी ब्रह्माकुमार बृजमोहन भाई के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। बृजमोहन भाई ने गुरुग्राम के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में अपने जीवन की आखिरी सांस ली है। श्रीगोपाल नारसन ने बताया कि श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से गीता के भगवान का परिचय देश दुनिया को देने के लिए वे बड़े बड़े सम्मेलन कराते रहे। साधु संत और महामंडलेश्वर भी उनके मुरीद थे। ब्रह्माकुमारीज महासचिव रहे वे पुराने समय के सीए थे, ओर आमजन को गीता का भगवान कौन? यह संदेश देने में जुटे ब्रह्माकुमारीज की ईश्वरीय सेवा कर रहे थे। बीके बृज मोहन अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक प्रेरक वक्ता, लेखक और समाज सुधारक थे। वे आध्यात्मिक ज्ञान व परमात्म सत्य को वैज्ञानिकता के साथ प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते थे। राजयोगी बीके बृजमोहन की आध्यात्मिक यात्रा सन 1953 में युवावस्था से शुरू हुई।उन्होंने भारतीय उर्वरक निगम में 17 वर्षों तक सेवा कार्य करने के बाद, ईश्वरीय सेवा के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित करने के लिए सन 1973 में उप वित्त प्रबंधक के पद से इस्तीफा दे दिया था। बीके बृज मोहन ने व्याख्यान देने और राजयोग रिट्रीट आयोजित करने के लिए दुनिया के सभी पांच महाद्वीपों में यात्राएं की । वे मॉरीशस में विश्व हिंदू सम्मेलन, दक्षिण अफ्रीका में अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक सम्मेलन, कजाकिस्तान में आध्यात्मिक संस्कृति के विश्व मंच जैसे कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रतिनिधि रहे हैं। ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय, माउंट आबू में वित्त एवं लेखा विभाग के प्रमुख, ब्रह्माकुमारीज के मुख्य प्रवक्ता, व सर्वोच्च निकाय और प्रबंध समिति के सदस्य भी रहे है। उन पर ब्रह्माकुमारीज एजुकेशनल सोसाइटी के सचिव, राजयोग शिक्षा एवं अनुसंधान फाउंडेशन नई दिल्ली के सचिव और ब्रह्माकुमारीज के राजनीतिज्ञ सेवा विंग की अध्यक्ष पद की भी जिम्मेदारी रही।
