January 18, 2026

लैंगिक असमानता विषय पर जागरूकता व्याख्यान

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रुड़की/लंढौरा (देशराज पाल)। आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) और चमनलाल महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में लैंगिक असमानता विषय पर एक ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामकुमार शर्मा ने इस प्रकार की व्याख्यान को समाज के लिए बेहतर बताया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों-छात्राओं में लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में व्याप्त भेदभावपूर्ण सोच को बदलने की दिशा में सार्थक संवाद स्थापित करना था।
मुख्य वक्ता समाजशास्त्र विभाग के प्रख्यात विद्वान डॉ. हिमांशु कुमार रहे। उन्होंने अपने विस्तृत और प्रभावशाली संबोधन में बताया कि लैंगिक असमानता केवल महिलाओं तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विकास और मानवाधिकारों के उल्लंघन से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने समझाया कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे क्षेत्रों में महिलाओं और पुरुषों के बीच मौजूद असमानताएं समाज की प्रगति में बाधक हैं। डॉ. हिमांशु कुमार ने ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक संदर्भों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार पितृसत्तात्मक सोच और सांस्कृतिक परंपराएं इस समस्या को बनाए रखने में योगदान देती हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और राष्ट्रीय आँकड़ों का उल्लेख करते हुए यह भी बताया कि भारत सहित कई देशों में शिक्षा और कानून के बावजूद लैंगिक समानता का लक्ष्य अभी भी पूरी तरह प्राप्त नहीं हुआ है। व्याख्यान के दौरान छात्रों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और अपने विचार व्यक्त किए। कई छात्रों ने बताया कि इस चर्चा ने उनकी सोच को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया है और उन्हें समाज में परिवर्तन के लिए प्रेरित किया है। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने नवागत छात्र-छात्राओं को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।
कार्यक्रम का संचालन और संयोजन महाविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति की संयोजक डॉ. अनामिका चौहान ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल विद्यार्थियों को बौद्धिक रूप से समृद्ध करते हैं, बल्कि उनमें संवेदनशीलता और समानता के मूल्यों को भी मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ सम्मिलित हुए। डॉ. अनामिका चौहान ने मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लैंगिक असमानता के विरुद्ध जागरूकता ही वास्तविक परिवर्तन की नींव है, और महाविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।

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