बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ना अत्यंत आवश्यक:सुदीक्षा
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*समागम में मसूरी जोन की लगभग 63 शाखाओं से आए नन्हे-मुन्ने बच्चों ने की उत्साहपूर्वक सहभागिता*
रुड़की (देशराज पाल)। संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित दिल्ली रोड स्थित फार्म रुड़की में जोन स्तरीय संत निरंकारी बाल समागम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मसूरी जोन की लगभग 63 शाखाओं से आए नन्हे-मुन्ने बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, श्रद्धालुओं एवं संगत ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
बाल समागम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ते हुए उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए प्रेरित करना तथा उनमें प्रेम, सेवा, सद्भाव और मानवता जैसे गुणों का विकास करना था। दिल्ली से आई ज्ञान प्रचारक बहन डाॅ0 ज्ञानमनी सक्सेना ने उपस्थित संगत एवं बच्चों को संबोधित करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज का संदेश सांझा किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही आध्यात्मिक ज्ञान एवं श्रेष्ठ संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। आध्यात्मिक शिक्षा बच्चों के चरित्र निर्माण की मजबूत नींव रखती है तथा उन्हें जीवन में सही दिशा, सकारात्मक सोच और उत्तम व्यक्तित्व प्रदान करती है। इस आयोजन में बाल संतों ने भजन, कविताएँ, प्रेरणादायी विचार, लघु नाटक तथा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रदर्शित करी। उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित भक्तों एवं श्रद्धालुजनों को भावविभोर कर दिया। वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में आध्यात्मिक शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजन न केवल बच्चों के भीतर नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील एवं आदर्श नागरिक बनने की दिशा भी प्रदान करते हैं। समागम के दौरान बच्चों को मानवता, प्रेम, सेवा, भाईचारे और सद्भावना के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई। साथ ही विभिन्न रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
