October 17, 2026
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*छठे नवरात्र को माता की पूजा शहद से करना अत्यंत शुभ माना गया*

*जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा हो, उन्हें इस दिन माँ कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए। इससे उन्हें मनोवांछित वर की प्राप्ति होगी*

ध्यान मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दद्यात् देवी दानवघातिनी ॥

माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। इस दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित होता है। योग साधना में इस चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित साधक अपना सर्वस्व माँ कात्यायनी को अर्पित कर देता है। ऐसा आत्मसमर्पण करने वाले भक्तों को सहज भाव से माँ के दर्शन प्राप्त होते हैं।

कात्यायनी पूजन का महत्व
माता कात्यायनी की पूजा करने से भक्त को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने अपने घर में कन्या प्राप्ति हेतु माँ भगवती की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान दिया कि “मैं तुम्हारे घर में कन्या के रूप में जन्म लूँगी।” तत्पश्चात महर्षि कात्यायन के घर पुत्री का जन्म हुआ, जिसका नाम कात्यायनी रखा गया। बाद में जब महिषासुर नामक राक्षस पृथ्वी पर अत्याचार करने लगा, तब तीनों देवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के तेज से उत्पन्न एक कन्या ने महिषासुर का वध किया। चूँकि वह कात्य गोत्र में जन्मी थीं, अतः उनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता कात्यायनी का वर्ण सोने के समान आभायुक्त है। वे अत्यंत सुंदर और अलौकिक हैं। इनके चार हाथ हैं — एक में कमल का पुष्प, दूसरे में तलवार, तीसरा हाथ अभयमुद्रा और चौथा हाथ वरमुद्रा में रहता है। छठे नवरात्र को माता की पूजा शहद से करना अत्यंत शुभ माना गया है। शहद का भोग लगाने से भक्त को सौंदर्य व आकर्षण का वरदान प्राप्त होता है। साथ ही ज्ञान प्राप्ति के लिए भी माता कात्यायनी की भक्ति अत्यंत फलदायी है। इस दिन की कथा पढ़ने के बाद दुर्गा सप्तशती का छठा अध्याय, माँ भगवती के 108 नाम, दुर्गा चालीसा का पाठ और आरती करना चाहिए। तत्पश्चात जल सूर्यदेव को अर्पित कर परिवारजनों में प्रसाद वितरित करें।
*विवाह हेतु विशेष मंत्र*
कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि ।
नंदगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ : हे माँ! आप समस्त प्राणियों में कात्यायनी रूप में विद्यमान हैं। आपको बार-बार प्रणाम है। हे माँ! मुझे शत्रुओं का संहार करने की शक्ति प्रदान करें।

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