मुख्यमंत्री पर बरसें कांग्रेसी, राज्य की सरकारी संपत्तियों को औने-पौने दाम पर बेचने का आरोप
*महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी ने अपने कैंप कार्यालय पर प्रेस वार्ता कर दी जानकारी*
*उत्तराखंड प्रदेश की सम्पत्तियों को बिकने नहीं देगी कांग्रेस -राजेंद्र चौधरी*
रुड़की (देशराज पाल)। आज मुख्यमंत्री के जन्म दिवस पर कांग्रेसी उन पर जमकर बरसें। आरोप लगाए गए कि उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के सरकारी विभागों की भूमि को नीलाम करने का रास्ता खोल दिया गया है।
बुधवार को दोपहर के समय अपने कैंप कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी एडवोकेट कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी ने उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एण्ड इन्फ्रास्टक्चर बोर्ड (UIDDB) का गठन कर विभिन्न बेशकीमती जमीनों को राज्य के बाहरी लोगों को सौंपने की तैयारी कर दी है।महत्वपूर्ण स्थानों पर राज्य के किसानों की भूमिधरी की जमीनों को बेचने का पूरा कानूनी इंतजाम करने के बाद अब राज्य सरकार की कुदृष्टि सरकारी विभागों की बहुमूल्य भूमि पर पड़ी है। उन्होंने बताया राज्य सरकार ने सबसे पहले 2023 में मसूरी स्थित पार्क एस्टेट (हाथीपांव) की 30 हजार करोड़ बाजार भाव की लगभग 142 एकड़ सरकारी भूमि को राजस एरो स्पोर्ट्स एण्ड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को 15 सालों के लिए केवल 1 करोड़ रुपया प्रति साल की लीज पर दे दिया। इस लीज को 15 सालों के लिए और बढाया जा सकता है। जिस साल इस जमीन को लीज पर दिया गया उसी साल उस जमीन पर एशियन विकास बैंक से 23 करोड़ रुपए कर्जा लेकर खर्च किया गया। यानि सरकार ने कर्ज लेकर जिस जमीन पर 23 करोड़ रुपया सजाने-संवारने पर लगाया उस जमीन पर वह 15 साल में 15 करोड़ रुपया कमायेगी। इस लीज को देने की प्रक्रिया में राज्य के सारे नियमों को ताक में रखा गया और इस निविदा में भाग लेने वाली तीनों कम्पनियां भी एक-दूसरे से मिली थी। जिस कम्पनी राजस एरो स्पोर्ट्स एण्ड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को जार्ज एवरेस्ट की बहुमूल्य सम्पत्ति दी गई वह उस कम्पनी आचार्य बालकृष्ण से संबधित कम्पनी है। सरकार को ऐसे नुकसान कराने वाले सौदे भाजपा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केवल अपने लाभ के लिए ही कर सकते हैं। राजेंद्र चौधरी ने कहा जार्ज एवरेस्ट लीज का कांग्रेस पार्टी की ओर से विधानसभा और बाहर विरोध करने पर भाजपा सरकार राज्य के सरकारी विभागों की जमीनें और सम्पत्ति बेचने के लिए 17 अक्टूबर 2023 को उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एण्ड इन्फ्रास्टक्चर कानून 2023 लायी। अब सरकार इस कानून के तहत बने उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एण्ड इन्फ्रास्टक्चर बोर्ड (यू०आई०आई०डी०बी) का प्रयोग नियम विरुद्ध और मनमाने ढ़ग से राज्य के विभागों की बहुमूल्य भूमियों और सम्पतियों को 90 सालों तक के समय के लिए औने-पौने दामों पर अपनी पसंदीदा कम्पनियों को लीज पर देने के लिए कर रही है। इस कानून के पास होने के बाद राज्य के सभी विभागों की सरकारी जमीनों और सम्पतियों को बेचने, लीज पर देने या पी०पी०पी० मोड में देने का कार्य अब यू०आई०आई०डी०बी को करना था। यू०आई०आई०डी०बी द्वारा सरकारी जमीनों और सम्पत्तियों को ठिकाने लगाने की प्रक्रिया भी बहुत सरल है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अधिकारियों की अनुशंसा समिति की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री अंतिम निर्णय लेकर उस विभाग की जमीन को यू०आई०आई०डी०बी को हस्तांतरित कर देते हैं। आज तक तक अनुशंसा समिति के 1200 एकड़ भूमि याने 6000 बीघा जमीन के प्रस्तावों पर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने हस्ताक्षर से अंतिम मुहर लगा चुके हैं। कई हजार बीघा जमीन के प्रस्ताव मुख्यमंत्री की पास अनुमति के लिए पड़े हैं और हजारों बीघा जमीन के प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति के पास लंबित हैं। कुल मिलाकर राज्य के सरकारी विभागों की हर सम्पत्ति अपने चहेतों को नीलाम करने के लिए रख दी है। जमीनें लीज पर देने के अलावा, यू०आई०आई०डी०बी विभिन्न विभागों की दुर्लभ, महत्वपूर्ण स्थानों की बेशकीमती सम्पतियों को भी पी०पी०पी० मोड में दे रही है। सरकार ने तुरंत लोक निर्माण विभाग के 25 निरीक्षण भवन और पर्यटन विभाग के कुछ होटलों को लीज पर निजी हाथों में देने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। जल्द ही यू०आई०आई०डी०बी यह प्रक्रिया शुरु कर देगी। ये सम्पतियां अरबों रुपए तक की हैं। अधिकांश सम्पतियां अंग्रेजो के समय की बनी हैं और अब इन स्थानों पर न कोई जमीन उपलब्ध है न बिकी के लिए कोई सम्पति उपलब्ध है। इसलिए इन्हें बेशकीमती याने जिस की कोई कीमत नहीं है कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इनमें से हाल में यू०आई०आई०डी०बी द्वारा नैनीताल के पटुवाडांगर की 14 एकड़ भूमि, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश में लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को लीज/पी०पी०पी० पर देने की प्रक्रिया शुरु की है। इन निविदाओं की शर्तें इतनी कड़ी रखी गई हैं कि, कोई स्थानीय व्यक्ति या कम्पनी इन निविदाओं में भाग ले ही नहीं सकती हैं। यानि राज्य की ये बहुमूल्य सम्पतियां राज्य के बाहर के लोगों को देने की पूरी तैयारी है। सरकार ने एक तरफ निविदा में भाग लेने की शर्तें बेहद कड़ी रखी हैं वहीं दूसरी ओर इन सम्पतियों के एवज में जो धनराशि देनी है उसकी शर्तें इतनी आसान हैं कि, कोई आम कारोबारी भी उस मूल्य को तय सालों में आराम से चुका सकता हैं। कुल मिलाकर राज्य की ये सारी जमीनें और सम्पतियां केवल मुख्यमंत्री की मुहर से ही नीलाम करने के लिए रखी जा रही हैं। इसलिए इस अपयश की सारी जिम्मेदारी भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री की है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति ने 15 मार्च 2024 की बैठक में देहरादून के रानी पोखरी के लिस्ट्रा बाद में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एन०एल०यू०) हेतु 10 एकड़ जमीन देने और पराग फार्म किच्छा उधमसिंह नगर की 50 एकड़ जमीन राष्ट्रीय न्यायालयीय विज्ञान विश्वविद्यालय को देने के लिए विचार हेतु रखी थी। ये दोनों संस्थान राष्ट्रीय स्तर के संस्थान है इनके निर्माण के लिए सारा धन भी केन्द्र सरकार को देना था लेकिन न तो अनुशंसा समिति ने और न राज्य के मुख्यमंत्री ने इन संस्थानों के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध करने का निर्णय लिया है। इससे साफ सिद्ध होता है कि, राज्य सरकार जनहित कारी कार्यों के बजाय विभागों की जमीन और सम्पतियों को अपने चहेतों को देने के निर्णय ले रही है। इसके अलावा नैनीताल के एस०टी०पी० प्लांट के लिए 5 एकड भूमि के प्रस्ताव सहित कई जनहित के कार्यों के प्रस्तावों पर आज तक मुहर नहीं लगी है। कुल मिलाकर भाजपा की सरकारों ने पिछले 10 सालों में राज्य न केवल राज्य के किसानों की जमीनों को बिकवाने के रास्ते खोले हैं बल्कि अब बहुमूल्य सरकारी भूमियों और सम्पतियों को भी अपने चहेतों के पास नीलाम करना शुरु कर दिया है। कांग्रेस पार्टी राज्य सरकार के इन मंसूबों को पूरा होने नहीं देगी। प्रेस वार्ता में जिला उपाध्यक्ष डॉ हरविंदर सिंह, मदन पाल भड़ाना, संजय गुड्डू, जिला महामंत्री मुनफेत अली, वैभव सैनी, मोहित त्यागी, कार्यालय सचिव नूर आलम आदि मौजूद रहे।
