आयुर्वेद जीवन जीने की कला:वैद्य टेक वल्लभ
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रुड़की (देशराज पाल)। आयुर्वेद के प्रणेता महर्षि चरक जयंती के उपलक्ष में भारत तिब्बत सहयोग मंच रुड़की ने संघ कार्यालय के सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया। नगर के गण्यमान्य व्यक्तियों के साथ मुख्य अतिथि संघ के नगर प्रचारक अमित सुंदर्याल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा की ऐसे आयोजनों से ज्ञानवर्धन होता है। आज मुझे भी आकर ज्ञानवर्धन हुआ। आयुर्वेद और महर्षि चरक के विषय में जानकारी प्राप्त हुई।
भारत तिब्बत सहयोग मंच के प्रदेश मंत्री वैद्य टेक वल्लभ ने कहा कि आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व महर्षि चरक ने उत्तराखंड की पर्वतमाला में रहकर विश्व का आयुर्वेद और स्वास्थ्य का सबसे पहला ग्रंथ चरक संहिता लिखा जिसमें सबसे पहले लिखा की सर्वमन्यत परित्यजेत शरीरं अनुपालयेत। अर्थात सभी कार्यों को छोड़कर सबसे पहले अपने शरीर और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। वैद्य वल्लभ ने यह भी जानकारी दी कि भारत तिब्बत सहयोग मंच द्वारा हर वर्ष त्वांग तीर्थ यात्रा का आयोजन होता है इस बार यह यात्रा 20 नवंबर से 25 नवंबर तक गुवाहाटी से गुवाहाटी तक जाएगी जिसमें अनेक धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ बुमला बॉर्डर चीन के साथ युद्ध 1962 के स्मृति चिन्ह स्मारक आदि के दर्शन भी होंगे और इसमें संघ के वरिष्ठ प्रचारक व भारत तिब्बत सहयोग मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार का भी सानिध्य प्राप्त होगा। इस अवसर पर कैलाश मानसरोवर की मुक्ति के लिए सभी को संकल्प भी कराया गया। वैद्य टेक वल्लभ ने अनेकों जड़ी बूटियों अश्वगंधा शतावर काला बांसां अपराजिता पाषाण भेद नीम आदि के पौधे वितरित किए गए। सांथर शाह गद्दी के महंत जोगेंद्र दास अनिल वर्मा डॉक्टर सुधीर गुप्ता आदि ने विचार रखें और कार्यक्रम के सभापति पूर्व प्रधानाचार्य डॉक्टर बी एल अग्रवाल ने विचार रखें। इस अवसर पर डॉक्टर इंद्रेश, पवन कुमार शर्मा, अशोक शर्मा, अरविंद गुप्ता, कनक सिंह आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
