पंच दिवसीय प्रान्तीय पंचपदी अधिगम पद्धति स्रोत व्यक्ति कार्यशाला का उद्घाटन
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रुड़की (देशराज पाल)। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित पंच दिवसीय प्रान्तीय पंचपदी अधिगम पद्धति स्रोत व्यक्ति कार्यशाला का उद्घाटन आनन्द स्वरुप आर्य सरस्वती विद्या मन्दिर प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केन्द्र रुड़की में हुआ।
कार्यशाला का शुभारम्भ डा0 अवनीश भटनागर उपाध्यक्ष विद्या भारती, डॉ विजयपाल सिंह प्रदेश निरीक्षक भारतीय शिक्षा समिति, उत्तराखण्ड़, नत्थीलाल बंगवाल सम्भाग निरीक्षक, गढ़वाल सम्भाग एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य अमरदीप सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। पंचपदी अधिगम पद्धति स्रोत व्यक्ति कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों की अन्तर्निहित कुंठित एवं सुप्त प्रतिभा को निखारना है, अर्थात उनके बौद्धिक कौशल का विकास करना है। बच्चे भविष्य में आने वाली मुश्किलों का सामना दृढ़ता और मनोयोग के साथ कर सकें और अपने जीवन के चरम उद्देश्य को सरलता के साथ प्राप्त कर सकें। उद्घाटन सत्र शुभारम्भ करते हुए डाॅ अवनीष भटनागर ने कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसी भावी पीढ़ी का विकास करना है जो मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत होकर देश को परम वैभव तक ले जाने में सक्षम हो तथा आत्मविकास के प्रति सचेत रहे। इस कार्यक्रम के अतिरिक्त विद्याभारती द्वारा बच्चों को तकनीकी के माध्यम से रुचिकर, बोधगम्य तथा सारगर्भित शिक्षा हेतु छोटे-छोटे वीडियो बनाए गए। ताकि पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा का विकास सुगमता से हो सके। पंचपदी अधिगम पद्धति के पाँच मुख्य सोपान है – अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग, प्रसार जिनके माध्यम से बच्चों में ज्ञान का स्थायित्व धारण करते हैं। बच्चों को इन सोपानो में प्रारंभ से लेकर अन्त तक हमें कैसे सिखाना है जिससे बच्चो में विषय के प्रति रूचि एवं बोधगम्य का भाव पैदा हो। यह कार्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधार पर आचार्यो की स्किल अपग्रडेशन में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, तकनीकी शिक्षा बच्चों के समग्र एवं सर्वांगीण विकास करने में उत्प्रेरक का काम करेगी। तकनीकी शिक्षा से बच्चों के व्यक्तित्व में अभूतपूर्व निखार आएगा।
