धामी सरकार सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध:मदन कौशिक
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*राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी चारधाम यात्रा को आपदा से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से गढ़वाल मंडल के सभी सात जनपदों में व्यापक माॅक ड्रिल*
*मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिये यात्रियों तक सभी अलर्ट पहुंचाने के निर्देश*
हरिद्वार (देशराज पाल)। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी चारधाम यात्रा को आपदा से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से गढ़वाल मंडल के सभी सात जनपदों में व्यापक माॅक ड्रिल आयोजित की गई। यह माॅक ड्रिल अलग-अलग आपदाओं के काल्पनिक परिदृश्यों के साथ 50 विभिन्न स्थलों पर एक साथ संपन्न हुई, जिसमें जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, आईएएफ, अर्द्धसैनिक बल, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन, परिवहन, लोक निर्माण, विद्युत, दूरसंचार तथा अन्य संबंधित विभागों ने सहभागिता की। यह माॅक ड्रिल सामुदायिक सहभागिता पर केंद्रित रही।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने माॅक ड्रिल का निरीक्षण किया तथा वर्चुअल माध्यम से विभिन्न जनपदों के इंसीडेंट कमाण्डरों, उत्तरदायी अधिकारियों, सेक्टर प्रभारियों एवं मैदानी टीमों से संवाद कर अभ्यास के दौरान समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता की जानकारी ली। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन तंत्र ने लंबा सफर तय किया है। राज्य ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता, पूर्व चेतावनी व्यवस्था, राहत एवं बचाव संसाधनों तथा संस्थागत समन्वय में लगातार सुधार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। उन्होंने मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिये यात्रियों तक सभी अलर्ट पहुंचाने के निर्देश दिए ताकि वे सुरक्षात्मक कदम उठा सकें। उन्होंने संवेदनशील एवं संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर वहां आवश्यक संसाधनों, मशीनरी, चिकित्सा सुविधाओं, संचार साधनों और राहत दलों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। माॅक ड्रिल में उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विनय रूहेला भी उपस्थित रहे । उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि यात्रा मार्गों पर यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, स्वास्थ्य सहायता, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता और आपात निकासी योजना को और प्रभावी बनाया जाए। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि चारधाम यात्रा जैसे संवेदनशील आयोजन के लिए एनडीएमए के सहयोग से यूएसडीएमए द्वारा प्रत्येक वर्ष माॅक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है।इस अभ्यास से मैदानी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन हुआ है तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और राहत-बचाव तंत्र की तैयारी और मजबूत हुई है। इस अवसर पर सचिव आनंद स्वरूप, एनडीएमए के लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल, एसीईओ प्रशासन महावीर सिंह चौहान, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, कमाण्डेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी, कमाण्डेंट एनडीआरएफ श्री संतोष कुमार, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी आदि मौजूद रहे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने देहरादून में माॅक ड्रिल के तहत विभिन्न स्थलों का फील्ड निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम ने सबसे पहले सहस्त्रधारा हेलीपैड पहुंचकर हेलीकाॅप्टर संचालन से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया, मौसम आधारित निगरानी तंत्र, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली तथा एयर ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम का निरीक्षण किया। इस दौरान आपात स्थिति में हवाई राहत एवं निकासी की तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की गई। इसके बाद टीम ने विभिन्न स्थानों पर जाकर व्यवस्थाओं को परखा। ऋषिकेश में ट्रांजिट कैंप में अग्निकांड के परिदृश्य पर अभ्यास किया गया। रुद्रप्रयाग जनपद में केदारनाथ हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर की आपात स्थिति का अभ्यास किया गया। हेलीपैड क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण और आपात संचालन का अभ्यास किया गया। चमोली जनपद में बदरीनाथ-गोविंदघाट मार्ग पर अचानक भारी हिमपात और हिमस्खलन जैसी स्थिति में यात्रियों के फंसने का परिदृश्य लिया गया। राहत दलों ने मार्ग बंद होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित होल्डिंग एरिया तक पहुंचाने, भोजन, दवा और आश्रय उपलब्ध कराने की व्यवस्था का अभ्यास किया। उत्तरकाशी जनपद में गंगोत्री क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने से आई आकस्मिक बाढ़ की स्थिति पर अभ्यास किया गया। पौड़ी जनपद के श्रीनगर स्थित धर्मशाला में भूकंप के झटकों के बाद निकासी और राहत का अभ्यास किया गया।
