October 11, 2026
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(देशराज पाल)
शारदीय नवरात्रि सनातन धर्म के सबसे पवित्र और आध्यात्मिक पर्वों में से एक है। ये नौ दिन मां दुर्गा की आराधना, आत्मशुद्धि, संयम और शक्ति की उपासना के दिन हैं। भक्त पूरे नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा कल्याण की कामना करते हैं। नवरात्रि का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ और व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने मन, विचारों और आचरण को भी पवित्र बनाना है। इसलिए पर्व की शुरुआत से पहले कुछ आवश्यक तैयारियां कर लेना उचित माना जाता है। घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। नवरात्रि शुरू होने से पहले घर के प्रत्येक कोने, विशेषकर पूजा घर और मंदिर की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा में इस्तेमाल होने वाले दीपक, घंटी, कलश, थाली और अन्य सामग्री को साफ कर लें। माता की चौकी को भी स्वच्छ वस्त्रों से सजाएं। सनातन परंपरा में स्वच्छता को पूजा-अर्चना का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। स्वच्छ वातावरण मन में प्रसन्नता और सकारात्मकता उत्पन्न करता है। इसलिए घर की सफाई को केवल एक औपचारिक काम न समझें, बल्कि इसे मां दुर्गा के स्वागत की पहली तैयारी मानें। घर के वातावरण को पवित्र और शांत बनाएं। सफाई के बाद घर के पूजा स्थल में गंगाजल का छिड़काव कर सकते हैं। इसके साथ धूप, दीप और सुगंधित सामग्री से वातावरण को भक्तिमय बनाएं। यदि संभव हो, तो परिवार के सदस्य मिलकर दुर्गा चालीसा, देवी मंत्र अथवा दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। याद रखें, पवित्रता केवल गंगाजल छिड़कने से नहीं, बल्कि हमारे विचारों और व्यवहार से भी आती है। घर में कलह, कटु वचन और अनावश्यक विवादों से बचें। नवरात्रि का स्वागत प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ करें। तामसिक भोजन से दूरी बनाएं। नवरात्रि में अनेक परिवार प्याज, लहसुन, मांसाहार और मदिरा से परहेज करते हैं। यदि आप भी नौ दिन व्रत या सात्त्विक भोजन का संकल्प ले रहे हैं, तो पहले से अपनी रसोई की व्यवस्था कर लें। फल, दूध, दही, मेवे और व्रत में उपयोग होने वाली सामग्री व्यवस्थित रखें। भोजन बनाते समय स्वच्छता और सात्त्विकता का ध्यान दें। हालांकि, खानपान की परंपराएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए अपनी धार्मिक परंपरा और व्रत के नियमों के अनुसार तैयारी करें। नवरात्रि का उद्देश्य केवल खानपान पर नियंत्रण रखना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर संयम और मन में सद्भाव विकसित करना भी है। बाल, नाखून और दाढ़ी-मूंछ के विषय में परंपरा का ध्यान रखें। नवरात्रि के दौरान बाल कटवाने, नाखून काटने और दाढ़ी बनवाने से परहेज करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। इसलिए जो श्रद्धालु इन नियमों का पालन करते हैं, वे नवरात्रि शुरू होने से पहले अपनी आवश्यक व्यक्तिगत देखभाल कर सकते हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये नियम सभी परंपराओं में समान नहीं हैं। इनका पालन अपनी पारिवारिक मान्यता, धार्मिक विश्वास और सुविधा के अनुसार करें। भक्ति का मूल आधार बाहरी रूप से अधिक आंतरिक पवित्रता, श्रद्धा और अनुशासन है। मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाएं और मां का स्वागत करें। स्वस्तिक सनातन संस्कृति में मंगल, शुभता और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के शुभारंभ पर घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाएं और संभव हो तो आम के पत्तों अथवा पुष्पों से द्वार सजाएं। पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। लाल चुनरी, पुष्प, अक्षत, रोली, दीपक और अन्य आवश्यक पूजन सामग्री तैयार रखें। कलश स्थापना करने वाले श्रद्धालु उसके लिए भी सभी सामग्री पहले से व्यवस्थित कर लें। ध्यान रहे कि कलश स्थापना का समय और विधि स्थानीय पंचांग तथा अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित करें। नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी जरूरत के अनुसार सामग्री पहले ही खरीद लें। इसमें कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, समा के चावल, साबूदाना, सेंधा नमक, मूंगफली, आलू, फल और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हो सकती हैं। पूजा के लिए रोली, मौली, कपूर, घी, धूप, दीपक, कलश, नारियल, लाल वस्त्र और पुष्पों की व्यवस्था भी कर लें। कन्या पूजन करने वाले परिवार अपनी परंपरा के अनुसार उसकी तैयारी भी पहले से कर सकते हैं। व्रत में स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। अपनी सेहत के अनुकूल भोजन और उपवास का तरीका अपनाएं।
नवरात्रि का वास्तविक संदेश
मां दुर्गा की आराधना हमें सिखाती है कि जीवन में शक्ति के साथ करुणा, साहस के साथ विवेक और श्रद्धा के साथ सेवा भी आवश्यक है। इन नौ दिनों में किसी जरूरतमंद की सहायता करें, बुजुर्गों का सम्मान करें, घर की महिलाओं के प्रति आदर रखें और अपने व्यवहार में विनम्रता लाएं।आइए, इस शारदीय नवरात्रि पर केवल घर ही नहीं, अपने मन को भी स्वच्छ करें। अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष को त्यागकर मां दुर्गा से सद्बुद्धि, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति मांगें।*

*जय माता दी! जय मां दुर्गा!*

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