शारदीय नवरात्र रविवार 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर मंगलवार तक और शुभ मुहूर्त भी जानें
|
Getting your Trinity Audio player ready...
|
*घट (कलश) स्थापना मुहूर्त चौघड़िया के हिसाब से*
*हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक शारदीय नवरात्र*
(देशराज पाल)
नवरात्रि, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘नौ रातें’ है, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह शक्ति की देवी, दुर्गा, को समर्पित है, जो ब्रह्मांड की सृजन, पालन और संहारक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह पर्व मुख्य रूप से वर्ष में दो बार मनाया जाता है: चैत्र नवरात्रि, जो वसंत ऋतु में आती है, और शारदीय नवरात्रि, जो शरद ऋतु के आगमन का प्रतीक है। शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि यह माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय की कथा से जुड़ा है, और इसका समापन दसवें दिन विजयादशमी के रूप में होता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह नौ दिन साधकों के लिए गहन आध्यात्मिक अभ्यास, व्रत और देवी के नौ रूपों की पूजा का समय होता है।
*शारदीय नवरात्रि शुभ मुहूर्त-:*
<span;><span;>* वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर रविवार से शुरू हो रहा है।
<span;><span;>* देवी पुराण में प्रातः के समय ही देवी का आह्वान, स्थापना व पूजन करने को लिखा है/लेकिन जिसमें चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग को त्याग बताया है, किंतु इन दोनों के आदि के दो चरणों को त्याग कर घट स्थापना करने की अनुमति भी प्रदान की है।
<span;><span;>* आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा रविवार को चित्रा नक्षत्र रात 10:33 तक रहेगा और वैधृति रात 9:05 तक रहेगा/ उपरोक्त मतानुसार इस दिन चित्रा नक्षत्र के प्रथम दो चरण दिन के 10:08 तक और वैधृति योग के प्रथम दो चरण सुबह 9:34 तक रहेंगे, अतः इस बार शारदीय नवरात्र पर प्रात: काल में घट स्थापना नहीं की जा सकेगी/शास्त्रों में प्रात: काल के बाद देवी का आह्वान व घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय अभिजीत मुहूर्त ही माना है जो 11 अक्टूबर, रविवार को दोपहर 11:50 से 12:35 तक रहेगा/
<span;><span;>* इसके अलावा चौखड़ियों के हिसाब से घट स्थापना करने वाले 11 अक्टूबर के दिन सुबह 10:08 से 12:10 तक लाभ का उत्तरार्ध व अमृत चौघड़िये में घट स्थापना कर सकते हैं
*घट (कलश) स्थापना मुहूर्त-:*
चौघड़िया के हिसाब से-:
<span;><span;>* सुबह 10:08 से दोपहर 12:10 तक
*अभिजीत मुहूर्त-:*
<span;><span;>* दोपहर 11:50 से 12:35 तक
पर्व का समापन 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी के साथ होगा, जिस दिन रावण दहन की परंपरा होती है//
देवी के वाहन का महत्व-:
देवी का आगमन सप्ताह के उस दिन के अनुसार होता है, जिस दिन नवरात्रि का प्रारंभ होता है । चूँकि इस साल शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ रविवार, 11 अक्टूबर को हो रहा है, माँ दुर्गा का आगमन गज (हाथी) पर होगा। हाथी पर सवार होकर आना एक अत्यंत शुभ लक्षण माना जाता है। यह पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और सौभाग्य का संचार करने का प्रतीक है।
*माता के नौ रूप:*
नवरात्रि में जिन नौ देवियों की पूजा होती है, वे कोई अलग-अलग देवता नहीं हैं, बल्कि वे एक ही महाशक्ति के नौ अलग-अलग स्वरूप हैं । ये नौ स्वरूप मानव चेतना के विभिन्न आध्यात्मिक चरणों और गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो हमें अज्ञानता से मुक्ति की ओर ले जाते हैं।
शैलपुत्री (पहला दिन): हिमालय की पुत्री, ये देवी किसी भी अनुभव के शिखर पर स्थित दिव्यता का प्रतीक हैं। वे जीवन में स्थिरता और समृद्धि लाती हैं/
ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन): यह स्वरूप गहन तपस्या और शुद्ध, अछूती ऊर्जा का प्रतीक है। उनकी पूजा से साधक को स्वतः ही सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं/
चंद्रघंटा (तीसरा दिन): यह रूप मन को मोहित करने वाली सुंदरता का प्रतीक है। ये सभी प्राणियों में मौजूद सौंदर्य का स्रोत हैं/
कूष्माण्डा (चौथा दिन): इन्हें प्राण ऊर्जा का पुंज माना जाता है, जो सूक्ष्मतम जगत से लेकर विशालतम ब्रह्मांड तक फैली हुई है। ये निराकार होकर भी सभी रूपों को जन्म देती हैं/
स्कंदमाता (पांचवां दिन): ये संपूर्ण ब्रह्मांड की संरक्षिका और सभी ज्ञान प्रणालियों की जननी हैं/
कात्यायनी (छठा दिन): चेतना के द्रष्टा पहलू से निकलने वाली ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो सहज ज्ञान की शक्ति लाती हैं। इन्हें मन की शक्ति भी कहा गया है, और रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए इनकी आराधना की थी/
कालरात्रि (सातवां दिन): ये गहन, अंधकारमय ऊर्जा का प्रतीक हैं, जो अनंत ब्रह्मांडों को धारण करती हैं। ये हर आत्मा को सांत्वना और शांति प्रदान करती हैं/
महागौरी (आठवां दिन): यह सुंदरता, कृपा और शक्ति का प्रतीक है, जो परम स्वतंत्रता और मुक्ति की ओर ले जाती है। उनकी पूजा से सभी पापों से मुक्ति मिलती है/
सिद्धिदात्री (नौवां दिन): ये अंतिम स्वरूप हैं, जो असंभव को संभव बनाती हैं और भक्तों को उनके प्रयासों का फल प्रदान करती हैं। उनकी आराधना से जीवन में चमत्कार प्रकट होते हैं//
