September 18, 2026
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*बॉलीवुड टी-सीरीज फ्रेम सुप्रसिद्ध कलाकार नितिन चक्रधारी व टीम का हुआ सम्मान*

*‘रुद्र राग’ और ‘महाकाल की लीला’ ने बांधा आध्यात्मिक समां, शिव-शक्ति के स्वरूप में कलाकारों ने छोड़ी अमिट छाप*

ऋषिकेश (देशराज पाल)। 72 सीढ़ी आस्था पथ स्थित गंगेश्वर घाट माँ गंगा आरती समिति की ओर से छठे गणेश महोत्सव के अवसर पर आशीर्वाद वाटिका में आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक संध्या श्रद्धा, संस्कृति और कला के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। दिल्ली से पहुंचे बॉलीवुड टी-सीरीज फ्रेम सुप्रसिद्ध कलाकार नितिन चक्रधारी एवं उनकी पूरी टीम ने ‘रुद्र राग’ और ‘महाकाल की लीला’ की भव्य एवं भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया।
नितिन चक्रधारी ने भगवान शिव, जबकि सोनिया ने शक्ति के स्वरूप की भूमिका निभाई। शिव और शक्ति के दिव्य स्वरूप में कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति, मंचीय कला और प्रभावशाली अभिनय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। जैसे-जैसे ‘महाकाल की लीला’ आगे बढ़ी, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में भावविभोर नजर आए। प्रस्तुति में भगवान शिव और शक्ति के संबंध, उनकी दिव्यता तथा आध्यात्मिक भावों को मंचीय कला के माध्यम से जीवंत रूप दिया गया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने धार्मिक कथाओं को मनोरंजन के साथ-साथ आध्यात्मिक अनुभूति से भी जोड़ दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।भव्य प्रस्तुति के उपरांत गंगेश्वर घाट माँ गंगा आरती समिति की ओर से नितिन चक्रधारी एवं उनकी पूरी टीम को सम्मानित किया गया। समिति के सदस्यों एवं गणमान्य अतिथियों ने कलाकारों को सम्मान प्रदान करते हुए उनकी प्रस्तुति की सराहना की। वहीं, शीशम झाड़ी स्थित श्री माँ कात्यायनी मंदिर में भी नितिन चक्रधारी एवं उनकी टीम का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मंदिर के संस्थापक-संचालक गुरविंदर सलूजा ने कलाकारों का स्वागत करते हुए उनकी प्रस्तुति की सराहना की।
गंगेश्वर घाट माँ गंगा आरती समिति,, 72,,, सीढी आस्था पथ
पर मयंक चक्रवर्ती एवं परिवार, सोनू चक्रवर्ती, न्यू स्टार क्लब के संस्थापक के.के. सचदेवा एवं परिवार, सान्या सचदेव छाबड़ा, न्यू स्टार क्लब अध्यक्ष मनोज साहल, अजय ब्रेजा एवं परिवार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंचीय कला के जरिए संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया। मंदिर के संस्थापक गुरविंदर सलूजा ने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं को मंचीय कला के माध्यम से नई पीढ़ी और जन-जन तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में कला और अध्यात्म का संगम लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करता है। कार्यक्रम में ‘रुद्र राग’ और ‘महाकाल की लीला’ के माध्यम से श्रद्धा, संस्कृति और कला का ऐसा सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ी।

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