April 18, 2026

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षारंभ में नवागंतुक विद्यार्थियों को दी शैक्षिक जानकारी

0
IMG_20260418_102133
Getting your Trinity Audio player ready...

*विश्वविद्यालय से आत्मीय भाव से जुड़ना ही असल दीक्षारम्भ:प्रो राजेश कुशवाहा*

देहरादून (देशराज पाल)। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय परिसर देहरादून में स्थापित आदर्श अध्ययन केंद्र, देहरादून पर शुक्रवार को नए प्रवेशित शिक्षार्थियों के मार्गदर्शन हेतु ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का गरिमामयी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवागंतुक शिक्षार्थियों  को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, परीक्षा पद्धति और सत्रीय कार्यों आदि  से अवगत कराना था।कार्यक्रम के प्रथम सत्र का शुभारंभ अतिथियों के आगमन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
विश्वविद्यालय के कुलगीत के पश्चात प्रभारी निदेशक डॉ सुभाष रमोला  ने स्वागत भाषण देते हुए सभी विद्यार्थियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय के नए वातावरण में समायोजित करना जिससे वे अपने आप को सहज महसूस करें और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से परिचित हों। मंच संचालन के साथ प्रवेश एवं परामर्श की बारीकियों पर डॉ. नरेंद्र जगुड़ी ने प्रकाश डाला, जबकि डॉ. भावना डोभाल ने परीक्षा और सत्रीय कार्यों की महत्ता समझाई। सहायक क्षेत्रीय निदेशक गोविंद सिंह रावत ने अध्ययन केंद्रों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा कीं। सामाजिक कार्य विभाग से प्रो०नीरजा सिंह ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को स्व-अध्ययन के लिए प्रेरित किया। मुख्य अतिथि के रूप में आगरा विश्व विद्यालय से प्रो० राजेश कुशवाहा ने अपने सम्बोधन में शिक्षार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय से आत्मीय भाव से जुड़ना ही असल दीक्षारम्भ है। उन्होंने गौतम बुद्ध का एक रोचक प्रसंग शिक्षार्थियों को सुनाकर दीक्षारंभ का महत्व बताते हुए उसका मूल मंत्र दिया। कार्यक्रम के द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रयोगात्मक तरीके से जानकारी देते हुए  विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय की विभिन्न प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की। अरविन्द कोटियाल ने प्रवेश प्रक्रिया, कुंदन सिंह ने परामर्श सत्रों की व्यवस्था, अजय ने सत्रीय कार्य जमा करने के नियमों और बृजमोहन सिंह खाती ने परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों से शिक्षार्थियों को रूबरू कराया  तथा शिक्षार्थियों के  प्रश्नों का समाधान किया। कार्यक्रम के तृतीय सत्र में शिक्षार्थियों को स्वअध्ययन से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय की ओर से निशुल्क पुस्तक वितरण मेला लगा कर शिक्षार्थियों को अपनी  रुचि अनुसार पुस्तकें वितरित की गई ।
कार्यक्रम  का समापन डॉ. नरेंद्र जगूड़ी के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नए शिक्षार्थी और विश्वविद्यालय का स्टाफ मौजूद रहा। शिक्षार्थियों ने इस सत्र को अपने शैक्षिक भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page